Basic Computer Components की जानकारी Hindi में ।

 Basic Components of Computer System in Hindi

सभी Types के Computers का basic structure एक Type का होता है। लेकिन computer की internal design Different type and Size की होती है। कंप्यूटर के पांच basic main components है। जो की diagram में बताया गया है-Components of computer system

Components of Computer System

HTG Explains: How Does a CPU Actually Work?

सीपीयू का पूरा नाम Central Processing Unit है। सीपीयू नीचे दिए गए यूनिट से मिलकर बना होता है-

  • Input Unit
  • Output Unit
  • Memory or Storage Unit
  • CU
  • ALU

Input Unit

कंप्यूटर की वे यूनिट जिनके द्वारा डाटा एवं कमांड को कंप्यूटर में इनपुट किया जाता है। उसे Input unit कहते हैं।

इनपुट यूनिट कई प्रकार की होती हैं। जैसे Keyboard, Mouse, Magnetic tape आदि।

Output Unit

कंप्यूटर की वे यूनिट जिनके द्वारा इनपुट किए गए डाटा एवं कमांड को प्रोसेस के बाद जो परिणाम प्राप्त होता है, या डिस्प्ले होता है। उसे Output unit कहते है। जैसे Printer, Monitor, Speaker आदि।

Control Unit (CU)

CU का पूरा नाम Control Unit है। इसके Through पूरे कंप्यूटर सिस्टम को control करने का कार्य किया जाता है।

यह unit सीपीयू की महत्वपूर्ण unit होता है।

Arithmetic Logic Unit (ALU)

ALU पूरा नाम Arithmetic Logic Unit है। यह कंप्यूटर के प्रमुख unit होती है। इसके द्वारा कंप्यूटर में सभी Arithmetical and logical work किए जाते हैं। यह processor का Internal part होता  है।

Memory Unit

यह कंप्यूटर की स्टोरेज यूनिट है। यह कंप्यूटर का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है।

इसमें हम डाटा प्रोग्राम आदि को स्टोर करके रख सकते हैं।

इसमें डाटा को बायनरी फॉर्मेट (0,1) में स्टोर किया जाता है। इसको नापने की साइज के आधार पर यूनिट है।

जैसे Byte, Kilobyte, Megabyte, Gigabyte एवं Terabyte इसमें सबसे छोटी यूनिट byte एवं सबसे बड़ी यूनिट terabyte होती है।

कंप्यूटर में दो प्रकार की मेमोरी होती है।
  • प्राइमरी मेमोरी (Primary memory)
  • सेकेंडरी मेमोरी (Secondary memory)

Primary memory

कंप्यूटर की यह मेमोरी Main Memory होती है। यह मेमोरी Temporary memory होती है। जब भी कंप्यूटर Turn OFF कर दिया जाता है। तो डाटा Loss हो जाता है।

इसकी स्पीड लगभग Processor के बराबर होती है। यह साइज में small and expensive मेमोरी होती है। RAM and ROM कंप्यूटर की प्राइमरी मेमोरी होती है।

Secondary memory

सेकेंड्री मेमोरी कंप्यूटर की Permanently Memory होती है। इसकी स्पीड प्राइमरी मेमोरी से कम होती है। यह आकार में Big and low cost memory होती हैं। कंप्यूटर में Secondary मेमोरी के तौर पर Hard disk, Compact disk आदि का प्रयोग किया जाता है।

Primary memory

इस मेमोरी को Main Memory भी कहा जाता है। यह दो Types की होती है।

  1. RAM
  2. ROM
    Types of Primary Memory

1. RAM (Random Access Memory)

रैम का पूरा नाम Random Access Memory है l इसे Main Memory और Primary Memory भी कहते हैं. RAM में CPU द्वारा वर्तमान में किये जा रहे कार्यों का डाटा और निर्देश स्टोर रहते हैं l यह मेमोरी CPU का भाग होती हैं. इसलिए इसका डाटा Direct Access किया जा सकता है l

इस कम्प्यूटर मेमोरी में डाटा और निर्देश Cells में Store रहता हैं. प्रत्येक Cell कुछ Rows एवं Columns से मिलकर बना होता हैं, जिसका अपना Unique Address होता हैं. इस युनिक एड्रेस को Cell Path भी कहते है l

CPU इन Cells से अलग-अलग डाटा प्राप्त कर सकता हैं. और वो भी बिना Sequent के मतलब l

RAM में उपलब्ध डाटा को Randomly Access किया जा सकता हैं. शायद इसी विशेषता के कारण इस मेमोरी का नाम Random Access Memory है l

RAM एक Volatile Memory होती हैं. इसलिए इसमे Store Data हमेशा के लिए स्टोर नही रहता है.
जब तक RAM में Power Supply On रहती है. तब तक डाटा रहता हैं.
Computer Shut Down होने पर RAM का सारा डाटा Auto Delete हो जाता हैं l

RAM की विशेषताएँ – Characteristics of Computer RAM

  • CPU का भाग होती हैं l
  • इसके बिना कम्प्यूटर अपना काम नही कर सकता हैं l
  • कम्प्यूटर की प्राथमिक मेमोरी होती हैं l
  • उपलब्ध डाटा Randomly Access कर सकते है l
  • अस्थाई मगर तेज होती हैं l
  • RAM मंहगी होती हैं l
  • Storage से भिन्न होती हैं l

RAM के विभिन्न प्रकार – Types of RAM

Computer लगातार विकास कर रहा हैं. जिसके कारण इसके अन्य महत्वपूर्ण भागों को भी उन्नत होना पडा है l जिनमे RAM भी शामिल है l RAM भी विकास के कारण अलग-अलग कार्य विशेषताओं में उपलब्ध हुई है l जिन्हे दो प्रमुख प्रकार में बांट सकते हैं l

  1. SRAM
  2. DRAM

1. SRAM

SRAM का पूरा नाम Static Random Access Memory है l जिसमें शब्द “Static” बताता हैं कि इस RAM में डाटा स्थिर रहता है l और उसे बार-बार Refresh करने की जरूरत नही पडती है l

SRAM - Basic Components of Computer System

यह RAM भी Volatile Memory होती हैं l इसलिए Power On रहने तक इसमे डाटा मौजूद रहता है l Power Off होते ही सारा डाटा Auto Delete  हो जाता हैं. इस मेमोरी को Cache Memory के रूप में Use किया जाता है l

2. DRAM

DRAM का पूरा नाम Dynamic Random Access Memory है l जिसमे शब्द “Dynamic” का मतलब होता हैं चलायमान l अर्थात हमेशा परिवर्तित होते रहना l इसलिए इस RAM को लगातार Computer system में Refresh करना पडता है l तभी इसमें डाटा स्टोर किया जा सकता है l

DRAM - Basic Components of Computer System

CPU को Main मेमोरी के रुप में DRAM का ही Use किया जाता है l क्योंकि इसमे से डाटा को Randomly प्राप्त किया जा सकता है l और इसमें नया डाटा अपने आप स्टोर होता रहता है l जिसके कारण CPU की कार्य क्षमता तेज बनी रहती है l

DRAM भी Volatile होती हैं. इसलिए इसमें भी डाटा Power Supply On रहने तक ही स्टोर रहता है l

आजकल Computers, Smartphones, Tablets आदि उपकरणों में DRAM का ही Use किया जाता है l

क्योंकि यह SRAM से सस्ती भी होती हैं l

2. ROM (Read Only Memory)

ROM का पूरा नाम Read Only Memory है l इसका डाटा केवल पढ़ा जा सकता है l

इसमें नया डाटा जोड़ नहीं सकते हैं l यह एक Non-Volatile Memory होती है l

इस मेमोरी में कम्प्यूटर फंक्शनेलिटी से संबंधित दिशा निर्देश स्टोर रहते है l

कम्प्यूटर को चालू करना के निर्देश इसी मेमोरी में स्टोर रहते है. जिसे “Booting” कहा जाता है l कम्प्यूटर के अलावा वॉशिंग मशीन, माइक्रोवेव , ओवन एवं अन्य इलेक्ट्रॉनिक Devices को ROM द्वारा ही Program किया जाता है l

इस स्थाई मेमोरी में डाटा हमेशा के लिए उपलब्ध रहता है l

Power Off होने पर भी डाटा डिलिट नही होता l यह भी प्राथमिक मेमोरी ही होती है l

Read Only Memory को Manufactures द्वारा ही एक बार Write करके दिया जाता हैं l

इसलिए, इसके डाटा के साथ कोई छेड़छाड़ संभव नहीं होती है l

ROM की विशेषताएँ – Characteristics of Computer ROM

  • ROM एक स्थाई मेमोरी होती हैं l
  • Basic Functionality के निर्देश स्टोर रहते हैं l
  • केवल Readable होती हैं l
  • RAM की तुलना में सस्ती होती हैं l
  • सी पी यू मेमोरी का भाग होती है l

ROM के विभिन्न प्रकार – Types of ROM

  1. MROM
  2. PROM
  3. EPROM
  4. EEPROM

1. MROM

MROM का पूरा नाम Mask Read Only Memory है l इसे Manufactures द्वारा डिवाइस में ही Programed किया जाता है l MROM अन्य ROMs की तुलना में सस्ती और कम स्पेस में ज्यादा डाटा स्टोर करने की क्षमता प्रदान करती है l मतलब इसकी Data Store Density अधिक होती हैं l

MASK ROM (MROM) Selection Guide | Engineering360

2. PROM

PROM का पूरा नाम Programmable Read Only Memory है l इस Memory Chip में डाटा एक बार Write किया जाता है l जो हमेशा बरकरार रहता हैं l

Explains Different Types Of ROM Memory Like PROM EPROM EEPROM

इस ROM में Data Write करने के लिए विशेष उपकरणॉं का इस्तेमाल किया जाता है l इन्हे PROM Programmer या PROM Burner भी कहा जाता है l और PROM में Data Write करने की प्रक्रिया को PROM Burning कहा जाता है l

3. EPROM

इसका पूरा नाम Erasable Programmable Read Only Memory है l जैसा इसके नाम से स्पष्ट होता है l इस ROM में Store डाटा को Erase यानि Delete भी जा सकता है l डाटा को मिटाने के लिए Ultra-Violet Light का इस्तेमाल किया जाता है l

Read only memory : PROM and EPROM (module 33)

4. EEPROM

EEPROM का पूरा नाम Electrically Erasable Programmable Read Only Memory होता है l जिसका डाटा किसी Electrical Charge द्वारा मिटाया जा सकता हैं. यह अन्य ROMs से थोड़ी धीमी होती है l

EEP ROM - Components of Computer System

Secondary Storage Device

सेकेंडरी स्टोरेज डिवाइस को Auxiliary storage device भी कहा जाता है। यह कंप्यूटर का भाग नहीं होती इसको कंप्यूटर में अलग से जोड़ा जाता है। इसमें जो डाटा स्टोर किया जाता है, वह स्थाई होता है। अर्थात कंप्यूटर बंद होने पर इसमें स्टोर डाटा डिलीट नहीं होता है।

 

आवश्यकता के अनुसार भविष्य में इसमें save फाइल या फोल्डर को खोल कर देख सकते हैं, या सुधार भी कर सकते हैं। एवं इसको यूजर के द्वारा डिलीट भी किया जा सकता है। इसकी storage Capacity High होती है एवं डाटा को access करने की Capacity Primary Memory से Low होती है।

डाटा को तीन प्रकार से access किया जा सकता है-

1) Sequential Access Storage

इस Process में Storage Data को उसी Sequence में access किया जाता है। जिस Sequence में Store किया जाता है। इस प्रकार से  access करने की Process को serial access Process भी कहा जाता है। इनका प्रयोग उन संस्थानों में होता है। जहां पर अधिक मात्रा में डाटा को स्टोर किया जाता है, और उसको उसी क्रमानुसार में लिया जाता है।

 

पुराने समय में Use होने वाली Audio और Video Tape cassette में इसी method का Use , डाटा को access करने के लिये किया जाता था। कंपनियों में डाटा का backup लेने के लिए एवं उसको access करने के लिए इसी क्रिया का प्रयोग किया जाता है। Magnetic tape इसी का उदाहरण है।

2) Index Sequential Access Method

इसमें Data को Sequential Access Method से ही Data को access किया जाता है। लेकिन इसमें Data को Store करते समय एक Index तैयार कर लिया जाता है।

 

इस Index में उस डाटा का सही पता मौजूद होता है। जिसकी सहायता से इसको open किया जाता जा सकता है। यह किताब के Index page की तरह होता है। इससे डाटा का पता खोजने में ज्यादा समय नष्ट नहीं होता है।

3) Direct Access Storage

इसमें डाटा को किसी भी क्रम access किया जा सकता है। एवं किसी भी क्रम में डाटा को स्टोर किया जा सकता है। इसकी access गति serial access की तुलना में अधिक होती है।

सेकेंडरी स्टोरेज डिवाइस के नाम इस प्रकार है

1) Magnetic tape

2) Magnetic Disk

  1. a) Hard Disk Drive (HDD)
  2. b) Solid State Drive (SDD)
  3. c) Floppy Disk

3) Optical Disk

Magnetic tape

Magnetic tape , Audio Tape Recorder के समान होती है। Magnetic tape , Driver spools से बनी  होती है।

इन दो spools के बीच में 9 हेड होते हैं। जो Information को read या write करते हैं।

प्रत्येक हेड स्वतंत्र पूर्वक कार्य करता है। एवं सूचनाओं को ट्रैक के अनुसार store करता है।

यह टेप प्लास्टिक के बने होते हैं। जिस पर ferromagnetic material की coding होती है।

Vintage Cassette Tape With Magnetic Tape Isolated On White ...

Magnetic tape की चौड़ाई 12.5 mm या 25 mm तक होती है। तथा लंबाई 500 मीटर से 1200 मीटर तक होती है। इस टेप पर 9 समान्तर ट्रक होते हैं।

9 हेड वाले tape में 8 ट्रैक का उपयोग सूचनाओं को स्टोर करने के लिए किया जाता। तथा 9 वीं ट्रैक का उपयोग parity bit को रिकॉर्ड करने के लिए किया जाता है।

इस Tape की Speed 100 Inches per Seconds होती है, और Information को Read-Write करने की Rate 8*104 bit per second होती है।

इसमें Data को Sequential access method के Through Store and Access किया जाता है। इसका Use Computer में data का backup लेने के लिए किया जाता है।

Magnetic Disk

मैग्नेटिक डिस्क एक स्टोरेज डिवाइस है जो डाटा write, rewrite और access करने के लिए मैग्नेटिज़ेशन प्रोसेस का उपयोग करता है। यह एक मैग्नेटिक कोटिंग के साथ कवर किया गया है और tracks, spots और sectors के रूप में डाटा स्टोर करता है। यह मैकेनिकल आर्म डिस्क को read और write के लिए प्रयोग किया जाता है  l

Magnetic Disk / Useful Notes - TV Tropes

Hard Disk(HDD)

हार्ड डिस्क एक सेकेंड्री और स्थायी डाटा स्टोरेज डिवाइस है। यह मानव मस्तिष्क के समान है जहां सभी अतीत और वर्तमान घटनाओं को संग्रहीत किया जाता है यह मैग्नेटिक मटेरियल (Magnetic Material) से बना होता है जो “Magnetic Recording Techniques का पालन करके डेटा को संग्रहीत करता है नवीनतम स्टोरेज तकनीक  4 terabyte (TB) तक पहुंच गई है।

HDD 1TB Seagate Hard Disk, Rs 2650 /piece Marc Computers | ID ...

हार्ड डिस्क एक स्टोरेज डिवाइस है, जिसका इस्तेमाल हम अपने डाटा को Store करने के लिए करते है। हार्ड डिस्क डाटा को Permanently स्टोर करता है। सबसे पहला हार्ड डिस्क IBM कंपनी ने बनाया था जिसकी स्टोरेज क्षमता महज़ 5 MB थी और वजन करीब 250 KG था बाद मे इसमें अनेको बदलाव किये गये जिसका परिणाम आज का आधुनिक Hard Disk है। इसमें एक गोलाकार डिस्क होती है जिसपे Digitally डाटा Save होती है जो बहुत तेजी से घूमती है जिसके स्पीड को हम RPM (Revolutions Per Minute) में मापते है, जाहिर सी बात है जितना ज्यादा RPM उतना ही ज्यादा डाटा Read और Write करने की स्पीड होती है।

Hard Disk (SSD)

SDD का पूरा नाम Solid State Drive है। SSD में मेमोरी चिप का प्रयोग होता है इसमें कोई भी मूविंग प्लेट्स नहीं होती इसीलिए इसमें आवाज नहीं होती और डाटा सेव करते समय या डाटा रीड करते समय बहुत ही तेजी से कार्य होता है। 

SSG 240gb Solid State Disks 2.5 " Hdd Hard Drive Disk Disc ...

SSD की विशेषताएं

(a) Fast– यह HDD की अपेक्षा बहुत तेज गति से कार्य करती है, जिससे कंप्यूटर की कार्य क्षमता भी बढ़ जाती है, इस तरह SSD के प्रयोग से काम समय में ज्यादा काम किया जा सकता है।

 

(b) Less Power consumption – यह पूरी तरह से माइक्रो चिप और स्मार्ट इलेक्ट्रॉनिक कम्पोनेंट्स पर आधारित है, इसीलिए इसको ऑपरेट करने में बहुत ही काम बिजली की खपत होती है।

 

(c) Silent – इसमें कोई भी मेकेनिकल पार्ट नहीं होता और न ही कोई भरी प्लेट्स, जिससे इसमें कोई आवाज उत्पन्न नहीं होती, यह बिना किसी आवाज के कार्य करती है।

 

(d) Small – माइक्रो चिप और इलेक्ट्रिक सर्किट बहुत ही काम जगह में लगाए जा सकते हैं इसी विशेषता के कारण SSD का आकर HDD की अपेक्षा बहुत छोटा होता है।

 

Floppy Disk

Floppy Disk एक तरह की डाटा स्टोरेज डिवाइस है. इसे सबसे पहली बार सन 1969 में create किया गया, उसी वर्ष जिस वर्ष Internet की शुरुवात करी गयी. यह Secondary या External Memory का भाग है. यह मैग्नेटिक डिस्क बहुत पतली तथा लचीली होती है इसलिए इन्हें फ्लोपी डिस्क या डिस्केट कहते है. यह मेलर नाम की प्लास्टिक की शीट की बनी होती है और इसके दोनों और मैग्नेटिक सामग्री चिपकी होती है l

मैग्नेटिक डिस्क को अन्य प्लास्टिक जैकेट में बंद किया जाता है तथा मैग्नेटिक डिस्क के एक छोटे से भाग को खुला रखा जाता है. Computer में उपयोग होने वाली फ्लोपी डिस्क आकार में 5.25 इंच (जिसे मिनी फ्लोपी भी कहते है) अथवा 3.5 इंच (जिसे माइक्रो फ्लोपी भी कहते है) की होती है l

Tales In Tech History: The Floppy Disk

  • फ्लोपी डिस्क बहुत ही कम मात्रा में डाटा को स्टोर कर सकती है. पहले Computer में इसका अधिक यूज़ होता था लेकिन CD के आने के बाद से इसका अस्तित्व ही खत्म हो गया क्योंकि उसमे स्टोरेज क्षमता अधिक थी. फ्लोपी डिस्क में सारा डाटा एक गोलाकार चुम्बकीय प्लेट में स्टोर होता है और वहीं से सारी डाटा को रीड किया जाता है l

Floppy Disk में स्टोर डाटा को केवल फ्लोपी डिस्क ड्राइव की मदद से ही एक्सेस किया जा सकता था. ये ड्राइव Computer हार्डवेयर का वो हिस्सा है जो फ्लोपी डिस्क से डाटा को रीड करता है और फिर उसे Computer पर प्रदर्शित करता है l

 

Optical Disk

यह एक कंप्यूटर स्टोरेज डिस्क है जो डेटा को डिजिटल रूप से स्टोर करती है और लेजर बीम (ऑप्टिकल डिस्क ड्राइव पर लगाए गए लेजर हेड से ट्रांसमिट) का उपयोग करती है।

What's An Optical Disc Writer And How It Works? | DESKDECODE.COM

ऑप्टिकल डिस्क को मुख्य रूप से पोर्टेबल और सेकंडरी स्टोरेज डिवाइस के रूप में उपयोग किया जाता है। यह पिछले पीढ़ी के मैग्नेटिक स्‍टोरेज मीडिया की तुलना में अधिक डेटा स्टोर कर सकते है, और इनकी लाइफ अपेक्षाकृत लंबी होती है।

Compact disks (CD), Digital Versatile/Video Disks (DVD) और Blu-ray disks वर्तमान में ऑप्टिकल डिस्क के सबसे अधिक इस्तेमाल किए जाने वाले टाइप हैं।

Memory Unit

कंप्यूटर केवल मशीनी भाषा ( Machine language ) समझता है यह वह भाषा होती है जिसमें केवल 0 और 1 दो अंको का प्रयोग होता है यह कंप्‍यूटर की Basic lanuage होती है जिसे कंप्‍यूटर सीधे सीधे समझ लेता है, मशीनी भाषा binary code में लिखी जाती है जिसके केवल दो अंक होते हैं 0 और 1 चूंकि कम्प्यूटर मात्र बाइनरी संकेत अर्थात 0 और 1 को ही समझता है और कंप्‍यूटर का सर्किट यानी परिपथ इन बायनरी कोड को पहचान लेता है और इसे विधुत संकेतो ( Electrical signals ) मे परिवर्तित कर लेता है इसमें 0 का मतलब low या Off है और 1 का मतलब High या On l

UPPCL|| COMPUTER- memory unit, by smart study - YouTube

जब बायनरी भाषा में कोई प्रोग्राम लिखा जाता है और वहां 1 और 0 टाइप किये जाते है यह Binary Digit कहलाते हैं अगर यानी 1 Binary Digit और 0 Binary Digit अब 1 Binary Digit कंप्‍यूटर में की मैमारी में 1 Bit को स्‍पेस लेता है इसका मतलब यह हुआ कि 1 Binary Digit = 1 Bit तो इस प्रकार कंप्यूटर मेमोरी (Computer Memory) की सबसे छोटी इकाई होती है बिट (bit) 

 

जब चार बिट को मिला दिया जाता है तो उसे निब्‍बल (Nibble) कहते हैं यानी 1 निब्‍बल = 4 बिट और 8 ि‍बिट के एक ग्रुप को Byte बाइट कहते हैं। 

 

सामान्‍यत एक जब आप अपने कीबोर्ड से कोई एक अंक या अक्षर अपने कम्‍प्‍यूटर में टाइप करते हैं तो उसको एक Byte से व्‍यक्‍त किया जाता है या सीधे शब्‍दों में कहें तो वह एक बाइट के बराबर जगह घेरता है। यानी 1 बाइट = 8 बिट = 2 निब्‍बल इस प्रकार लगभग 11099511627776 बाटइ के समूह को टैराबाइट कहा जाता है और एक टैराबाईट में लगभग 20 लाख MP3 को स्‍टोर किया जा सकता है। 

 

  • 1 बिट (bit) = 0, 1
  • 4 बिट (bit) = 1 निब्‍बल
  • 8‍ बिट = 1 बाइट्स (Byte)
  • 1000 बाइट्स (Byte) = एक किलोबाइट (KB)
  • 1024 किलोबाइट (KB) = एक मेगाबाइट (MB)
  • १०२४ मेगाबाइट (MB) = एक गीगाबाइट (GB)
  • 1024 गीगाबाइट (GB) = एक टेराबाइट (TB)
  • १०२४ टेराबाइट (TB) = एक पेंटाइट (PB)
  • 1024 पेडाबाइट (PB) = एक एक्साबाइट (EB)
  • १०२४ एक्साबाइट (EB) = एक ज़ेटबाइट (ZB)
  • 1024 ज़ेटाबाइट (ZB) = एक ज़ेटबाइट (YB)
इस तरह हमने Basic Components of Computer System के बारे में बहुत कुछ जाना, यदि अभी भी आपके कोई सवाल है तो आप नीचे कमेंट के द्वारा पूछ सकते हैं।

1. उम्मीद करता हूं दोस्तों आपको यह Article पसंद आया होगा और इसे आपको जरूर मदद मिली होगी

तो अगर आपको हमारा आर्टिकल पसंद आता है, तो उसे सोशल मीडिया पर अपने दोस्तों के साथ जरूर शेयर करें

और आप कोई सवाल है तो हमे कमेंट करें !

2. हर जानकारी अपनी भाषा हिंदी में सरल शब्दों में प्राप्त करने के हमारे फेसबुक पेज को लाइक करे

जहाँ आपको सही बात पूरी जानकारी के साथ प्रदान की जाती है हमारे फेसबुक पेज को लाइक करने के लिए

यहाँ Click करें l


यह भी पढ़ें-

Basic Computer Components की जानकारी Hindi में ।

History of computer | Generation of Computer की पूरी जानकारी Hindi में l

सॉफ्टवेयर क्या होता है – What is Software(In Hindi)?

कम्प्युटर के फायदे और नुकसान हिंदी में।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here